Friday, 12 April 2013

जय जिनेन्द्र

जय जिनेन्द्र जय जिनेन्द्र जय जिनेन्द्र जय जिनेन्द्र जय जिनेन्द्र जय जिनेन्द्र जय जिनेन्द्र जय जिनेन्द्र जय जिनेन्द्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । श्रीकेशवाय नमः । नारायणाय नमः । माधवाय नमः । गोविंदाय नमः । विष्णवे नमः । मधुसूदनाय नमः । त्रिविक्रमाय नमः ।
शांताकरम भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णँ शुभांगम। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगभिर्ध्यानिगम्यम। वंदे विष्णु भवभयहरणम् सर्वलोकैकनाथम॥जय जय नारायण नारायण हरी हरी ,स्वामी नारायण नारायण हरी हरी तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी हरी हरी तेरी महिमा, तेरी महिमा, तेरी महिमा सबसे प्यारी प्यारी हरी हरी

राज राजेश्वरी माता की जय

राज राजेश्वरी माता की जय राज राजेश्वरी माता की जय
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम...सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणि नमोअस्तुते हे अम्बे बलिहारी लगे सबको तू प्यारी तेरी शेरों की सवारी देखें सब नर नारी हे अम्बे बलिहारी .
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः ।नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम् ॥१॥
रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः ।ज्योत्स्ना यै चेन्दुरुपिण्यै सुखायै सततं नमः ॥२॥
कल्याण्यै प्रणतां वृध्दै सिध्दयै कुर्मो नमो नमः ।नैऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नमः ॥३॥
दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै ।ख्यातै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः ॥४॥
अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः ।नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः ॥५॥
या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शाध्दिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥६॥
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥७॥



नवरात्र की नौ देविया

 नवरात्र की नौ देवियां शैलपुत्री

नवरात्र पर्व के प्रथम दिन को शैलपुत्री नामक देवी की आराधना की जाती है. पुराणों में यह कथा प्रसिद्ध है कि हिमालय के तप से प्रसन्न होकर आद्या शक्ति उनके यहां पुत्री के रूप में अवतरित हुई और इनके पूजन के साथ नवरात्र का शुभारंभ होता है.

ब्रह्मचारिणी

भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए पार्वती की कठिन तपस्या से तीनों लोक उनके समक्ष नतमस्तक हो गए. देवी का यह रूप तपस्या के तेज से ज्योतिर्मय है. इनके दाहिने हाथ में मंत्र जपने की माला तथा बाएं में कमंडल है.

चंद्रघंटा

यह देवी का उग्र रूप है. इनके घंटे की ध्वनि सुनकर विनाशकारी शक्तियां तत्काल पलायन कर जाती हैं. व्याघ्र पर विराजमान और अनेक अस्त्रों से सुसज्जित मां चंद्रघंटा भक्त की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहती हैं.

कूष्मांडा

नवरात्र पर्व के चौथे दिन भगवती के इस अति विशिष्ट स्वरूप की आराधना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इनकी हंसी से ही ब्रह्माण्ड उत्पन्न हुआ था. अष्टभुजी माता कूष्मांडा के हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत-कलश, चक्र तथा गदा है. इनके आठवें हाथ में मनोवांछित फल देने वाली जपमाला है.

स्कंदमाता

नवरात्र पर्व की पंचमी तिथि को भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है. देवी के एक पुत्र कुमार कार्तिकेय (स्कंद) हैं, जिन्हें देवासुर-संग्राम में देवताओं का सेनापति बनाया गया था. इस रूप में देवी अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए बैठी होती हैं. स्कंदमाता अपने भक्तों को शौर्य प्रदान करती हैं.

कात्यायनी

कात्यायन ऋषि की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवती उनके यहां पुत्री के रूप में प्रकट हुई और कात्यायनी कहलाई. कात्यायनी का अवतरण महिषासुर वध के लिए हुआ था. यह देवी अमोघ फलदायिनी हैं. भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने देवी कात्यायनी की आराधना की थी. जिन लडकियों की शादी न हो रही हो या उसमें बाधा आ रही हो, वे कात्यायनी माता की उपासना करें.

कालरात्रि

नवरात्र पर्व के सातवें दिन सप्तमी को कालरात्रि की आराधना का विधान है. यह भगवती का विकराल रूप है. गर्दभ (गदहे) पर आरूढ़ यह देवी अपने हाथों में लोहे का कांटा तथा खड्ग (कटार) भी लिए हुए हैं. इनके भयानक स्वरूप को देखकर विध्वंसक शक्तियां पलायन कर जाती हैं.

महागौरी

नवरात्र पर्व की अष्टमी को महागौरी की आराधना का विधान है. यह भगवती का सौम्य रूप है. यह चतुर्भुजी माता वृषभ पर विराजमान हैं. इनके दो हाथों में त्रिशूल और डमरू है. अन्य दो हाथों द्वारा वर और अभय दान प्रदान कर रही हैं. भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए भवानी ने अति कठोर तपस्या की, तब उनका रंग काला पड गया था. तब शिव जी ने गंगाजल द्वारा इनका अभिषेक किया तो यह गौरवर्ण की हो गई. इसीलिए इन्हें गौरी कहा जाता है.

सिद्धिदात्री

नवरात्र पर्व के अंतिम दिन नवमी को भगवती के सिद्धिदात्री स्वरूप का पूजन किया जाता है. इनकी अनुकंपा से ही समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं. अन्य देवी-देवता भी मनोवांछित सिद्धियों की प्राप्ति की कामना से इनकी आराधना करते हैं. मां सिद्धिदात्री चतुर्भुजी हैं. अपनी चारों भुजाओं में वे शंख, चक्र, गदा और पद्म (कमल) धारण किए हुए हैं. कुछ धर्मग्रंथों में इनका वाहन सिंह बताया गया है, परंतु माता अपने लोक प्रचलित रूप में कमल पर बैठी (पद्मासना) दिखाई देती हैं. सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्र में नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान पूर्ण हो जाता है.।!!!! Astrologer Gyanchand Bundiwal. Nagpur । M.8275555557 !!!

शुक्रवार विशेष श्री महालक्ष्मी


शुक्रवार विशेष श्री महालक्ष्मी श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये।
ओम् श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसिद प्रसिद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मेय नमः
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः। .श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये।
श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा ।. ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः

लक्ष्मी पवित्रता और सात्विकता की प्रतीक हैं। महालक्ष्मी पवित्र उद्देश्यों, परिश्रम और लगन के साथ समाज-हित को ध्यान में रखते हुए अर्जित संपत्ति या धन की देवी हैं। देवी लक्ष्मी अभावों का अंत करती है । इनके पूजन से जीवन में कर्म, विचार और व्यवहार सकरतमक बनते हैं । शास्त्र अनुसार लक्ष्मी उपासना किसी भी विशेष दिन जैसे, शुक्रवार, नवमी, नवरात्रि या अमावस्या की रात्रि पर करने से समृद्धि में वृद्धि होती है । 

जो भक्त देवी लक्ष्मी की पूजा करता है उनके लिए संसार में कुछ भी अप्राप्य नहीं हैं । गृह लक्ष्मी देवी गृहणियों यानि घर की स्त्रियों में लज्जा, क्षमा, शील, स्नेह और ममता रूप में विराजमान रहती हैं । शुक्रवार को लक्ष्मी देवी हेतु विशेष दिन माना जाता है । इस दिन लक्ष्मी की पूजा-अर्चना पुष्प व चंदन से कर चावल की खीर से भोग लगाया जाता है । धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना काफी आसान है । यदि आप चाहते है की आप के धन में दुगना तिगुना वृद्धि हो तो करें मां लक्षमी को प्रसन्न और करें शुक्रवार के दिन यह कुछ विशेष उपाय ।

- शुक्रवार के दिन कार्यस्थल जाने से पहले निम्नलिखित मंत्र का एक माला जप करें ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृह धनं पूरय पूरय चिन्तायै दूरय दूरय स्वाहा’’। इससे व्यवसाय में अद्भुत लाभ होगा ।

- गाय के दूध से श्रीयंत्र का अभिषेक करने के बाद ,अभिषेक का जल पूरे घर में छिड़क दें और घर में जहां आपका धन पड़ा हो वहां श्रीयंत्र को कमलगट्टे के साथ धन स्थान पर रख दें । इससे धन लाभ होने लगेगा ।

- धन की वृद्धि के लिए शुक्रवार के दिन पीले कपड़े में पांच पीली कौड़ी और थोड़ी सी केसर चांदी के सिकके के साथ बांधकर जहां आपके पैसे पड़े होते हैं वहीं रखने से इसका अच्छा प्रभाव सामने आने लगता है ।

- शुक्रवार के दिन सायंकाल मे काली हल्दी की गांठ का सिंदूर व धूप से पूजन करके चांदी के दो सिक्के के साथ लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखने पर आर्थिक समस्याएं हल होती हैं ।

- सुबह उठते ही मां लक्ष्मी को नमन कर सफेद वस्त्र धारण करें और मां लक्ष्मी के श्री स्वरूप व चित्र के सामने खड़े होकर श्री सूक्त का पाठ करें एवं कमल फूल चढ़ाएं ।

- शुक्रवार के दिन सफेद रंग की वस्तुओं और सफेद रंग के खाद्य पदार्थ का दान करना शुभ माना जाता है और जितना हो सकें इस दिन गरीबों को दान दें ।

- शुक्रवार के दिन एक मुट्ठी अखंडित बासमती चावल को बहते जल में महालक्ष्मी का स्मरण करते हुए छोड़ देने से धन की वृद्धि बनी रहती है 
लक्ष्मी पूजन कर 11 कौड़ियां लक्ष्मी पर चढ़ाएं । अगले दिन कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें इससे धन वृद्धि होती है लक्ष्मी का षोडश पूजन कर उन्हे मालपूए या गुलाबजामुन का भोग लगाकर उसे गरीबों में बांटने से चढ़ा हुआ कर्जा उतर जाता है ।
 शुक्रवार के दिन भगवान विष्णु का अभिषेक दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर करने से मां लक्षमी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं ।
 हल्दी और चावल पीसकर उसके घोल से घर के मुख्य द्वार पर ‘श्रीं’ लिखने से लक्ष्मी प्रसन्न होकर धन देती हैं 
 शुक्रवार को लक्ष्मी के मंदिर जाकर शंख, कौड़ी, कमल, मखाना, बताशा अर्पित करें। इससे अलक्ष्मी दूर होती है।

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सम्मोहन


सम्मोहन
हथेली में हनुमन्त बसै, भैरु बसे कपार। नरसिंह की मोहिनी, मोहे सब संसार। मोहन रे मोहन्ता वीर, सब वीरन में तेरा सीर। सबकी नजर बाँध दे, तेल सिन्दूर चढ़ाऊँ तुझे। तेल सिन्दूर कहाँ से आया ? कैलास-पर्वत से आया। कौन लाया, अञ्जनी का हनुमन्त,गौरी का गनेश लाया। काला, गोरा, तोतला-तीनों बसे कपार। बिन्दा तेल सिन्दूर का, दुश्मन गया पाताल। दुहाई कमिया सिन्दूर की, हमें देख शीतल हो जाए। सत्य नाम, आदेश गुरु की।
ॐ सं सम्मोहनाय सम्मोहनाय सं सोमाय नम: ||
ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः स्वाहा

श्री महालक्ष्म्यै नमः। श्री महालक्ष्मी

महालक्ष्मयै नम: नमस्तेस्तु महामाये श्रीपिठे सुरपुजीतेशन्खचक्र गदाहस्ते महालक्ष्मि नमोस्तुते॥नमस्ते गरुढारुढे कोलसुर भयन्करिसर्वपाप हरे देवि महालक्ष्मि नमोस्तुते॥सर्वद्नये सर्ववर्दे सर्व द्रुशठभयन्करिसर्व दुखहरे देवि महालक्ष्मि नमोस्तुते॥सिद्धिबुद्धि प्रदे देवि भक्तिमुक्ति प्रदयिनिमन्त्रमुर्ते सदादेवि महालक्ष्मि नमोस्तुते॥आद्न्त्यरहिते देवि आध्यशक्ति महेश्वरियोगजे योग सम्भुते महालक्ष्मि नमोस्तुते॥श्थुलसुश्ख्म महारौद्रे महाशक्ति महोदरेमहापाप हरे देवि महालक्ष्मि नमोस्तुते॥पद्मासन स्थिते देवि परब्रम्ह स्वरुपिणिपरमेशि जग्न्मातर महालक्ष्मि नमोस्तुते॥श्वेतामबर धरे देवि नानाल्लन्कार भुशितेजगत्शिते जगन्मातर महालक्ष्मि नमोस्तुते॥महालक्ष्म्यश्ट्कम स्तोत्रम य:पठे भक्ति मान्नरः सर्व सिद्धि मिवप्नोप्ति राज्यम प्राप्नोप्ति सर्वदा एक काले पठे नित्यम महापाप विनाशम द्विकालम यः पठे नित्यम धन धान्य सम्न्वितः त्रिकालम यः पठे नित्यम महा शत्रु विनाशनम महालक्ष्मिभ्र्वे नित्यम प्रसन्ना वरदा शुभा ।!!!! Astrologer Gyanchand Bundiwal. Nagpur । M.8275555557 !!!


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