Tuesday, 6 September 2016

ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः


ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः 


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Sunday, 4 September 2016

गणेश चतुर्थी ,,,,चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए

गणेश चतुर्थी ,,,,चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए,,,गणेश चतुर्थी के दिन भगवान विनायक का जन्मोत्सव शुरू हो जाएगा। यद्यपि चंद्रमा उनके पिता शिव के मस्तक पर विराजमान हैं, किंतु गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए ,,शास्त्रीय मान्यता है कि इस दिन चंद्रदर्शन से मनुष्य को निश्चय ही मिथ्या कलंक का सामना करना पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार भाद्र शुक्ल चतुर्थी के दिन श्रीकृष्ण ने चंद्रमा का दर्शन कर लिया।,,,फलस्वरूप उन पर भी मणि चुराने का कलंक लगा। कि इस दिन किसी भी सूरत में चंद्रमा का दर्शन करने से बचना चाहिए। शास्त्रों में इसे कलंक चतुर्थी भी कहा गया है,,,चंद्रदर्शन देता मिथ्या कलंक
जब श्री गणेश का जन्म हुआ, तब उनके गज बदन को देख कर चंद्रमा ने हंसी उड़ाई। क्रोध में गणेश जी ने चंद्रमा को शाप दे दिया कि उस दिन से जो भी व्यक्ति चंद्रमा का दर्शन करेगा, उसे कलंक भोगने पड़ेंगे।

चंद्रमा के क्षमा याचना करने पर गणपति ने अपने शाप की अवधि घटाकर केवल अपने जन्मदिवस के लिए कर दी। फलस्वरूप यदि गलती से चंद्रमा का दर्शन गणेश चतुर्थी के दिन हो जाए तो गणेश सहस्त्रनाम का पाठ कर दोष निवारण करना चाहिए।,,,,गणपति की बेडोल काया देख कर चंद्रमा उन पर हंसे थे, इसलिए श्रीगणेश ने उन्हें श्रापित कर दिया था।,,,गणपति के श्राप के कारण चतुर्थी का चंद्रमा दर्शनीय होने के बावजूद दर्शनीय नहीं है। गणेश ने कहा था कि इस दिन जो भी तुम्हारा दर्शन करेगा, उसे कोई न कोई कलंक भुगतना पडे़गा। इस दिन यदि चंद्रदर्शन हो जाए, तो चांदी का चंद्रमा दान करना चाहिए।
द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने चतुर्थी का चांद देख लिया तो उन पर स्यमन्तक मणि की चोरी का झूठा आरोप लगा था।
तुलसीदासजी ने भी रामचरित मानस में बताया है, 'पर नारी पर लीलार गौसांई, तजहूं चौथ के चंद्र की नांई।' गणेश पुराण में बताया है कि केवल भाद्रपद शुक्लपक्ष विनायकी गणेश चतुर्थी का चंद्रदर्शन नहीं करना चाहिए। वर्ष भर की अन्य चतुर्थीयों की पूजा चंद्रदर्शन से ही पूर्ण होती है।
गणेशजी ने चंद्रमा को दिया था श्राप,,,,,एक बार गणेशजी कहीं जा रहे थे तो गजमुख व लम्बोदर देखकर चंद्रमा ने उनका मजाक उड़ाया था। तभी गणेशजी ने चंद्रमा को श्राप दिया कि आज से जो भी तुम्हे देखेगा, उस पर मिथ्या ''कलंक"" लगेगा।Astrologer Gyanchand Bundiwal M. 0 8275555557.
यदि अनजाने में चंद्रमा का दर्शन हो जाए, तो इस दोष की शान्ति हेतु श्रीमद् भागवत जी के दशमस्कन्ध के 57 वें अध्याय को पढ़कर स्यमन्तक मणि की कथा सुने।
इसके अलावा इस श्लोक का पाठ भी कर सकते हैं -
सिह: प्रसेनम् अवधीत्, सिंहो जाम्बवता हत:।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्मेषस्यमन्तक: !!

श्री गणेश के इन मंत्रों का करें जाप

श्री गणेश के इन मंत्रों का करें जाप शिव-पार्वती के पुत्र गणेश जी को हम कई नामों से जानते है जैसे कि सुमुख, एकदंत, लंबोदर, विकट, विघ्ननाशन, विनायक, धूमकेतु, गजानन है। जिन्हे हम कष्टो को हरने वाला मानते है। गणेश जी अपने भक्तों से बड़ी जल्दी प्रसन्न होते है और उनकी इच्छाओं की पूर्ति भी करते है। अगर आप बुध ग्रह अशुभ स्थिति में है जिसके कारण आपको कई समस्याओं का सामना करना पड रहा है तो इस दिन गणेश जी की पूजा अवश्य करें। अगर आपकी कुंडली में बुध ग्रह का दोष है तो बुधवार को गणेश जी पूजा करने बुध ग्रह के दोष समाप्त हो जाएगे। अगर आप इन मंत्रों का जाप विधि-विधान के साथ करेगे तो आपकी हर मनोकामना पूर्ण होगी। साथ ही आपको जिस काम में सफलता प्राप्त नहीं हो रही है। इस मंत्र के जाप से वो भी काम पूर्ण होगे। जानिए इन मंत्रो के बारें में .अगर आप किसी परेशानी से निजात पाना चाहते है तो बुधवार के दिन गणेशजी को सिंदूर चढ़ाएं। क्योंकि गणेश जी को भी सिंदूर अति प्रिय होता है। जिस तरह भगवान हनुमान को पसंद है। सिंदूर चढाते समय विशेष मंत्र को भी पढ़ें, क्योकि वैसे तो हर देवी-देवता पर सिंदूर चढाया जाता है, लेकिन शिव परिवार या शिव के सभी अंश अवतारों पर सिंदूर चढ़ाने का एक अलग ही महत्व है। इसलिए हर बुधवार को इस मंत्र के साथ गणेशजी को सिंदूर चढ़ाना चाहिए। मंत्र : सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्।।,2.बुधवार को गणेश जी को शमी के पत्ते चढ़ाने पर बुद्धि तेज होती है साथ ही सभी क्लेशो का नाश और मानसिक शांति मिलती है। शमी के पत्ते चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करें त्वत्प्रियाणि सुपुष्पाणि कोमलानि शुभानि वै। शमी दलानि हेरम्ब गृहाण गणनायक।।

Saturday, 3 September 2016

गणेश जी को खुश करने के उपाय राशि के अनुसार

 गणेश जी को खुश करने के उपाय राशि   के अनुसार,,,गणेश उत्सव पर गणेश जी को खुश करने के लिए के 10 उपाय नित्य प्रात: व शायंकाल में गणेश की पूजा व दर्शन
बुधवार के दिन मूंग के लड्डू, दूर्वा, गुड़ एवं दक्षिणा गणपति भगवान को अर्पित करें
गणेश मन्त्रों का लाल चंदन की माला से ही जाप करें
पूजा में गणेश कवच, चालीसा, स्त्रोत तथा गणेश के 108 नामों का जाप करें
इन दिनों आप पूर्ण रूप ब्रहंचर्य का पालन करे तथा शुद्ध शाकाहार का सेंवन करें
मंगलवार के दिन गुड़ का भोग लगायें
नाखून काटना, बाल काटवाना, सेब करना आदि काम न करें
भूखे को मूंग की खिचड़ी खिलायें।
देशी घी व सिंदूर से गणेश भगवान की मालिश करें
21 ,दूर्वा की जोड़ी को गणेश स्त्रोत पढ़ने के बाद चढ़ाएं
गणेश चतुर्दशी है और शाम को भक्‍तगण वि‍घ्‍नहर्ता की कैसे पूजा करें और राशि‍यों के अनुसार कि‍तने लडडुओं का भोग कि‍स चीज में लगाकर करें और कि‍स मंत्र का जाप करें जि‍ससे गणेश जी प्रसन्‍न हो जायें और सभी के बि‍गडे हुये काम भी बनने लगेा बात
मेष राशि की करें इसके जातक 9 ,लडडू शहद में लपेट कर चढ़ातें हैं और ऊॅ गणेशाय नम: का जाप करते हैं तो उनके बि‍गड़े काम बनने लगेंगेा इसी प्रकार
वृष राशि के जातक यदि 6, लडडू का भोग गणेशजी को लगाकर ऊॅ वि‍घ्‍नाशाये नम: का मंत्र पढ़ते हैं तो उनके भी बि‍गड़े काम बनने शुरू हो जायेंगेा
मि‍थुन राशि के जातक गणेश जी को 5 ,,,लडडू पान के पत्‍ते पर रखकर चढा़ते हुये ऊॅ लम्‍बोदराय नम:मंत्र का जाप करते हैं तो गणेशजी उनकी सारी परेशानि‍यों को हर लेंगे
कर्क राशि के लोग गणेश जी को खुश करने के लिए 4,, लडडू दूध में लगाकर चढ़ाते हैं और ऊॅ पार्वती नम: मंत्र का जाप करते हैं तां उनके भी दुख दूर होने लगेंगेा
सिह राशि के लोग 10, लडडू शहद में मि‍लाकर चढ़ाते हैं और ऊॅ एकदंताये नम: मंत्र का जाप करते हैं तो उनके भी अच्‍छे दि‍न शुरू हो जायेंगेा
कन्‍या राशि के लोग 5, लडडू दूर्वा घास मि‍लाकर गणेश जी को अर्पित करते हैं और ऊॅ वटवै नम:मंत्र जपते हैं तो उनकी भी सारी परेशानी गणेशजी दूर कर देंगेा
तुला राशि के लोग 6, लडडू मलाई लगाकर गणेशजी को भोग लगाते हैं और ऊॅ सूपकर्णाय नम: मंत्र का जाप करते हैं तो उनकी भी सारी परेशानी दूर हो जायेगी ।इसी प्रकार
वृश्‍चि‍क राशि के लोग 9, लडडू शहद में मि‍लाकर ऊॅ गणेशाय नम:मंत्र का जाप,
धनु राशि के लोग 21, लडडू शक्‍कर डालकर एंव ऊॅ सिद्धिवि‍नायक नम: मंत्र का जाप,
मकर राशि के जातक 8,,लडडू ऊॅ वि‍नाकाय नम:का जाप,
कुंभ राशि के लोग 8,,लडडू को सौंफ में मि‍लाकर चढ़ाते हैं और ऊॅ वक्रतुंडाय नम:मंत्र का जाप और
मीन राशि के लोग 21,, लडडू केसर मि‍लाकर चढ़ाते हैं और ऊॅ पार्वतीपुत्राय नम: मंत्र का जाप करते हैं तो उनके बिगड़ हुये काम बनने लगेंगे।
।।Astrologer Gyanchand Bundiwal M. 0 8275555557.
गणेश जी का पूजन करने से सभी प्रकार के रोग, आर्थिक विपन्नता, भय, नौकरी, व्यवसाय, मकान, वाहन, विवाह, सन्तान, पदोन्नति आदि से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा।

Thursday, 25 August 2016

गणेश चतुर्थी इस वर्ष 5 सितंबर 2016

गणेश चतुर्थी इस वर्ष 5 सितंबर 2016 , गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था।
गणेश चतुर्थी 2016 की तारीख और गणेश पूजन का शुभ समय
गणेश चतुर्थी की तारीख ,,, 5 सितंबर 2016
चतुर्थी शुरू होने का समय ,,,4 सितंबर 2016 शाम 6 :54
चतुर्थी समाप्त होने का समय ,, 5 सितंबर 2016 रात 9 :10
गणेश पूजन का शुभ समय ,,, 5 सितंबर मध्याह्न ,,,, दिन में ,, 11 :10 से 1 :39
इसीलिए हर वर्ष इस दिन गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाती है। गणेश जी बुद्धि , सौभाग्य , समृद्धि , ऋद्धि सिद्धि देने वाले तथा विघ्नहर्ता
यानि संकट दूर करने वाले माने जाते है । विनायक , गजानन , लम्बोदर , गणपति , आदि भी गणेश जी के ही नाम है।
गणेश चतुर्थी
सफलता या लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सम्पूर्ण ज्ञान हासिल करना , अपनी त्वरित बुद्धि से विवेकपूर्ण निर्णय करना , लगातार मेहनत और
प्रयास करते रहना , जरुरी होते है । गणेश जी की पूजा का यही सन्देश है। इसी वजह से गणेश जी को सबसे पहले पूजा जाता है।
महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी और गणेश विसर्जन बड़ी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाते है। घर और मंदिरों में गणेश जी की बड़ी सुन्दर प्रतिमाएँ
साज श्रृंगार के साथ स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की जाती है । दस दिन यानि अनन्त चतुर्दशी तक भक्ति भाव और विधि विधान से गणेश जी
की पूजा की जाती है । ग्यारवें दिन किसी जलाशय , नदी या समुद्र में मूर्ती को विसर्जित किया जाता है। गाजे बाजे के साथ नाचते गाते लोग
गणेश विसर्जन में हिस्सा लेते है। हर तरफ “गणपति बाप्पा मोर्या ” जैसे शब्द गूंजते नजर आते है।
गणेश चतुर्थी ,,,,गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले कई जगह मंदिरों में सिंजारा मनाया जाता है जिसमे गणेश जी को मेहंदी अर्पित की जाती है। महिलाएं भजन
गाती है। प्रसाद आदि वितरित किये जाते है।
चन्द्रमा को किस समय नहीं देखें
इस दिन चाँद को देखना अशुभ माना जाता है। कहते है चाँद को गणेश जी का श्राप लगा हुआ है। इस दिन चाँद को देखने से झूठा कलंक लग
सकता है। भगवान श्री कृष्ण को भी चाँद देखने पर मणि चोरी के झूठे कलंक का सामना करना पड़ा था। ये धार्मिक मान्यताएं है परन्तु
इसके कुछ वैज्ञानिक कारण जरूर होंगे ।
तृतीया तिथि को चाँद नहीं देखने का समय 4 सितंबर 2016 को शाम 6 :54 से 8 :36
चतुर्थी तिथि के दिन चाँद नहीं देखने का समय ,, 5 सितंबर 2016 सुबह 9 :21 से रात 9 :12
गणेश जी का पूजन करने की सामग्री और विधि
गणेश पूजन की सामग्री ,,,,,चौकी या पाटा,,,,जल कलश,,,,लाल कपड़ा,,,पंचामृत,,,,रोली , मोली , लाल चन्दन....जनेऊ,,,,गंगाजल,,,सिन्दूर,,,चांदी का वर्क,,,,लाल फूल या माला,,,इत्र,,,मोदक या लडडू,,,धानी,,,सुपारी,,,लौंग , इलायची,,,नारियल ,,,फल,,,दूर्वा – दूब,,,पंचमेवा,,,घी का दीपक,,,धूप , अगरबत्ती कपूर
गणेश पूजन की विधि,,,सुबह नहा धोकर शुद्ध लाल रंग के कपड़े पहने। गणेश जी को लाल रंग प्रिय है। पूजा करते समय आपका मुँह पूर्व दिशा में या उत्तर दिशा में
होना चाहिए
सबसे पहले गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं । उसके बाद गंगा जल से स्नान कराएं ।
गणेश जी को चौकी पर लाल कपड़े पर बिठाएं। ऋद्धि सिद्धि के रूप में दो सुपारी रखें।
गणेश जी को सिन्दूर लगाकर चांदी का वर्क लगाएं।
लाल चन्दन का टीका लगाएं। अक्षत , चावल , लगाएं।
मौली और जनेऊ अर्पित करें।
लाल रंग के पुष्प या माला आदि अर्पित करें। इत्र अर्पित करें।
दूर्वा अर्पित करें।
नारियल चढ़ाएं। पंचमेवा चढ़ाएं।
फल अर्पित करेँ।
मोदक और लडडू आदि का भोग लगाएं।
लौंग इलायची अर्पित करें।
दीपक , अगरबत्ती , धूप आदि जलाएं।
गणेश मन्त्र उच्चारित करें ,ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव , सर्व कार्येषु सर्वदा ।।॥.Astrologer Gyanchand Bundiwal। nagpur . 0 8275555557

बछ बारस , गौवत्स द्वादशी, ,,बछ बारस 2017 शनिवार 19 अगस्त को मनाई जाएगी।

बछ बारस , गौवत्स द्वादशी, ,,बछ बारस 2017 शनिवार 19 अगस्त को मनाई जाएगी।
बछ बारस भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की द्वादशी को मनाई जाती है। बछ यानि बछड़ा गाय के छोटे बच्चे को कहते है । इस दिन को मनाने
का उद्देश्य गाय व बछड़े का महत्त्व समझाना है। यह दिन गोवत्स द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। गोवत्स का मतलब भी गाय का बच्चा
ही होता है। बछ बारस का यह दिन कृष्ण जन्माष्टमी के चार दिन बाद आता है । कृष्ण भगवान को गाय व बछड़ा बहुत प्रिय थे तथा गाय
में सैकड़ो देवताओं का वास माना जाता है। गाय व बछड़े की पूजा करने से कृष्ण भगवान का , गाय में निवास करने वाले देवताओं का और
गाय का आशीर्वाद मिलता है जिससे परिवार में खुशहाली बनी रहती है ऐसा माना जाता है।
बछ बारस
इस दिन महिलायें बछ बारस का व्रत रखती है। यह व्रत सुहागन महिलाएं सुपुत्र प्राप्ति और पुत्र की मंगल कामना के लिए व परिवार की
खुशहाली के लिए करती है। गाय और बछड़े का पूजन किया जाता है। इस दिन गाय का दूध और दूध से बने पदार्थ जैसे दही , मक्खन , घी
आदि का उपयोग नहीं किया जाता। इसके अलावा गेहूँ और चावल तथा इनसे बने सामान नहीं खाये जाते ।
भोजन में चाकू से कटी हुई किसी भी चीज का सेवन नहीं करते है। इस दिन अंकुरित अनाज जैसे चना , मोठ , मूंग , मटर आदि का उपयोग
किया जाता है। भोजन में बेसन से बने आहार जैसे कढ़ी , पकोड़ी , भजिये आदि तथा मक्के , बाजरे ,ज्वार आदि की रोटी तथा बेसन से बनी
मिठाई का उपयोग किया जाता है।
बछ बारस के व्रत का उद्यापन करते समय इसी प्रकार का भोजन बनाना चाहिए। उजरने में यानि उद्यापन में बारह स्त्रियां , दो चाँद सूरज की
और एक साठिया इन सबको यही भोजन कराया जाता है।
शास्त्रो के अनुसार इस दिन गाय की सेवा करने से , उसे हरा चारा खिलाने से परिवार में महालक्ष्मी की कृपा बनी रहती है तथा परिवार
में अकालमृत्यु की सम्भावना समाप्त होती है।
बछ बारस की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर शुद्ध कपड़े पहने।
दूध देने वाली गाय और उसके बछड़े को साफ पानी से नहलाकर शुद्ध करें।
गाय और बछड़े को नए वस्त्र ओढ़ाएँ।
फूल माला पहनाएँ।
उनके सींगों को सजाएँ।
उन्हें तिलक करें।
गाय और बछड़े को भीगे हुए अंकुरित चने , अंकुरित मूंग , मटर , चने के बिरवे , जौ की रोटी आदि खिलाएँ।
गौ माता के पैरों धूल से खुद के तिलक लगाएँ।
इसके बाद बछ बारस की कहानी सुने। बछ बारस की कहानी के लिए क्लीक करें और पढ़ें
बछ बारस
इस प्रकार गाय और बछड़े की पूजा करने के बाद महिलायें अपने पुत्र के तिलक लगाकर उसे नारियल देकर उसकी लंबी उम्र और सकुशलता
की कामना करें। उसे आशीर्वाद दें। बड़े बुजुर्ग के पाँव छूकर उनसे आशीर्वाद लें। अपनी श्रद्धा और रिवाज के अनुसार व्रत या उपवास रखें।
मोठ या बाजरा दान करें। सासुजी को बयाना देकर आशीर्वाद लें।
यदि आपके घर में खुद की गाय नहीं हो तो दूसरे के यहाँ भी गाय बछड़े की पूजा की जा सकती है। ये भी संभव नहीं हो तो गीली मिट्टी से गाय
और बछड़े की आकृति बना कर उनकी पूजा कर सकते है।
कुछ लोग सुबह आटे से गाय और बछड़े की आकृति बनाकर पूजा करते है। शाम को गाय चारा खाकर वापस आती है तब उसका पूजन धुप,
दीप , चन्दन , नैवेद्य आदि से करते है।
बछ बारस

Monday, 22 August 2016

आञ्जनेय स्तोत्रम् ॥नीलकृत

आञ्जनेय स्तोत्रम् ॥नीलकृत
ॐ जय जय । श्रीआञ्जनेय । केसरीप्रियनन्दन । वायुकुमार ।
ईश्वरपुत्र । पार्वतीगर्भसम्भूत । वानरनायक ।
सकलवेदशास्त्रपारग । सञ्जीवनीपर्वतोत्पाटन ।
लक्ष्मणप्राणरक्षक । गुहप्राणदायक । सीतादुःखनिवारक ।
धान्यमाली शापविमोचन । दुर्दण्डीबन्धविमोचन ।
नीलमेघराज्यदायक । सुग्रीवराज्यदायक । भीमसेनाग्रज ।
धनञ्जयध्वजवाहन । कालनेमिसंहार । मैरावणमर्दन ।
वृत्रासुरभञ्जन । सप्तमन्त्रिसुतध्वंसन । इन्द्रजिद्वधकारण ।
अक्षकुमारसंहार । लङ्किणीभञ्जन । रावणमर्दन ।
कुम्भकर्णवधपरायण । जम्बुमालिनिषूदन । वालिनिबर्हण ।
राक्षसकुलदाहन । अशोकवनविदारण । लङ्कादाहक ।
शतमुखवधकारण । सप्तसागरवालसेतुबन्धन ।
निराकार-निर्गुण-सगुणस्वरूप । हेमवर्णपीताम्बरधर ।
सुवर्चलाप्राणनायक । त्रिंशत्कोट्यर्बुदरुद्रगणपोषक ।
भक्तपालनचतुर । कनककुण्डलाभरण ।
रत्नकिरीटहारनूपुरशोभित । रामभक्तितत्पर ।
हेमरम्भावनविहार वक्षताङ्कितमेघवाहक ।
नीलमेघश्याम । सूक्ष्मकाय । महाकाय । बालसूर्यग्रसन ।
ऋष्यमूकगिरिनिवासक । मेरुपीठकार्चन । द्वात्रिशदायुधधर ।
चित्रवर्ण । विचित्रसृष्टिनिर्माणकर्त्रे । अनन्तनाम ।
दशावतार । अघटनघटनासमर्थ । अनन्तब्रह्मन् ।
नायक । दुर्जनसंहार । सुजनरक्षक । देवेन्द्रवन्दित ।
सकललोकाराध्य । सत्यसङ्कल्प । भक्तसङ्कल्पपूरक ।
अतिसुकुमारदेह । अकर्दमविनोदलेपन । कोटिमन्मथाकार ।
रणकेलिमर्दन । विजृम्भमाणसकललोककुक्षिम्भर ।
सप्तकोटिमहामन्त्रतन्त्रस्वरूप ।
भूतप्रेतपिशाचशाकिनीडाकिनीविध्वंसन ।
शिवलिङ्गप्रतिष्ठापनकारण । दुष्कर्मविमोचन ।
दौर्भाग्यनाशन । ज्वरादिसकलरोगहर । भुक्तिमुक्तिदायक ।
कपटनाटकसूत्रधारिन् । तलाविनोदाङ्कित । कल्याणपरिपूर्ण ।
मङ्गलप्रद । गानलोल । गानप्रिय । अष्टाङ्गयोगनिपुण ।
सकलविद्यापारीण । आदिमध्यान्तरहित । यज्ञकर्त्रे ।
यज्ञभोक्त्रे । षण्मतवैभवसानुभूतिचतुर । सकललोकातीत ।
विश्वम्भर । विश्वमूर्ते । विश्वाकार । दयास्वरूप ।
दासजनहृदयकमलविहार । मनोवेगगमन । भावज्ञनिपुण ।
ऋषिगणगेय । भक्तमनोरथदायक । भक्तवत्सल ।
दीनपोषक । दीनमन्दार । सर्वस्वतन्त्र । शरणागतरक्षक ।
आर्तत्राणपरायण । एक असहायवीर । हनुमन् विजयीभव ।
दिग्विजयीभव । दिग्विजयीभव ।
इति नीलकृतं श्रीआञ्जनेयस्तोत्रम् ।

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